हर वक़्त ज़िन्दगीके,
दायरेपे खड़ा हूँ |
क्या पता किस कदम,
उसे लांघ जावूँ |
Ganesh Bagler(30 Nov 2010; Diary Notes)
दायरेपे खड़ा हूँ |
क्या पता किस कदम,
उसे लांघ जावूँ |
Ganesh Bagler(30 Nov 2010; Diary Notes)
Ask me not where all I've been,Ask me where do I come from;Ask me not what all I've seen,Ask me what I hold within.
—Ganesh Bagler
पुछो ना हमसे हम आयें कहाँसे,
पुछो नज़ारे क्या देखे हैं हमने;
ना पुछो क्या-क्या गुजरी हैं हमपे,
ये पुछो क्या-कुछ समेटा है हमने,
हर इक कदम पे.
—गणेश बागलेर
मेरा जहाँ(Aug—Sep
जीना हैं मुश्किल,
इस महफ़िल में दोस्त,
हैं सामने कोई मेरे,
ये कोई और तो नहीं?
खोया हूँ रात-दिन,
ख्वाबों कि दुनिया में,
मिलतें हैं लोग जो,
कहीं सच तो वो नहीं?
लड़ता हूँ तूफानोंको,
लिए अपने-आप में,
ढूँढता हूँ इक मंजिल,
वो है भी, या नहीं?
होगा इक जहाँ,
मेरा भी तो कहीं,
तुफानोंका मेरे,
होगा मकाँ वहीँ.
t 2009, Berlin; May 2010, India; Ganesh Bagler)तनहा
मैं रुसवां हूँ खुदपर,
मैं क्यूं यहाँ,
महसूस करता हूँ खुद को बंदिश में,
हैं खुदाँ कहाँ?
ये ज़िन्दगी के नगमे गातें लोग,
आसपास मेरें,
मैं मौत की गहराईयों में खोया,
हैं ज़िन्दगी क्या?
हमेशा ही खोया हूँ मैं,
खोज में, उस अनजान सवाल के जवाब की,
जो शायद खुद ही हैं आखरी सत्य जीवन का.
क्या पता मैं हूँ भी या नहीं,
ये तनहाई मुझे चीरती हैं;
और भीड़ में भी मैं खुद को,
महसूस करता हूँ तनहा.
बहुत सारी यादें,
दफन थीं यहाँ,
कुरेदतां हूँ बहूत, कुछ मिलता ही नहीं;
ठीक ही तो हैं,
इक अरसा गुजरा हैं.
~~~~~~~~~~~~
मालूम नहीं हमें, के हम
डरे हैं मौत से, या बेखबर है उससे
पर माहौल ही कुछ ऐसा है
के दस्तक सुनाई देती है.
~~~~~~~~~~~~~~~
भूलें नहीं अभीतक हम उस फिजां को,
याद आती हैं.
~~~~~~~~~~~~~~~
अलग से नशे कि ज़रुरत ही क्या हमें,~~~~~~~~~~~~~~~
हर इक ख़याल खो जाने को काफी है;
मरने की ज़रुरत ही क्या हमें,
हर लम्हा मौत, बस आना बाकी है.
होगा इक जहाँ, मेरा भी तो कहीं;If externals factors, people, were to be responsible for what I am, I would never be able to script my destiny. Hence:
तुफानोंका मेरे, होगा मकाँ वहीं.
अब होता नहीं मुझसे,If feelings had a share (market) value, it would have been, perhaps, the most difficult one to predict. A mind loaded with sad thoughts and feelings could fly in ecstasy courtesy of an infectious smile...
किसीसे गिला करुँ;
क्या करुँ शिकवां,
जो करुँ अपने-आप से करुँ.
हलकेच तिथून एक मुग्ध हास्य येते,Reality is a difficult thing to get hold of. Materialistically as well as philosophically. Please see my blog, "Reality eludes me" for more elaboration.
मन पाखरू होते, आभाळी झेप घेते.
काय आहे रूप वास्तवाचे, कळले नाही मला;-- गणेश (Ganesh Bagler)
शोधताहे सत्य त्याचे, मिथ्या म्हणती ज्याला.
What is reality truly, eludes me forever;
I'm seeking for it, if there were one ever.